छावनी परिषद कार्यालय, रानीखेत


जिला अल्मोड़ा,

पिन कोड 263645 उत्तराखण्ड


दूरभाष संख्या 05966 220228


फैक्स संख्या 05966 220614

पूछताछ



ई-मेल ceoranikhet@gmail.com



अभियान्त्रिकी अनुभाग छावनी परिषद रानीखेत कर्मचारियों की कुल संख्या -13

1. श्री दिलीप सिंह बिष्ट, सहायक अभियन्ता के कार्य

(क) भूमि से सम्बन्धित मामलों के निस्तारण में विकास अथवा रख-रखाव के कार्य का निर्वाह करना जिसके अन्तर्गत सीमा निर्धारण, भवनों के निर्माण हेतु प्रार्थना पत्रों, लीज भूमि के नवीनीकरण, भूमि के स्वतंत्र पट्टों के निस्तारण आदि कार्य सम्मिलित हैं तथा उच्च पदाधिकारियों को इसकी जानकारी देना।

(ख) अवैध निर्माण को पर नियन्त्रण रखना तथा अतिक्रमण को रोकना तथा अतिक्रमण के विरूद्ध कार्यवाही करना

(ग) पी0डब्ल्यू0डी0 विभाग के गैंगमैनों के कार्या, विद्युत व्यवस्था के कर्मचारियों तथा जलापूर्ति की सामान्य कार्या की व्यवस्था का पर्यवेक्षण करना।

(घ) विकास तथा मरम्मत कार्य का विवरण नापजोख पुस्तिका में अंकित करना।

2. श्री कृपाल सिंह महरा, मानचित्रकार के कार्य

(क) भूमि से सम्बन्धित मामलों के निस्तारण में, विकास तथा मरम्मत सम्बन्धी कायों का निर्वाह करना तथा उच्च पदाधिकारियों को इसकी जानकारी प्रदान करना। जिसके अन्तर्गत सीमा निर्धारण, भवन निर्माण हेतु प्रार्थना पत्र, लीज भूमि के नवीनीकरण, भूमि के स्वतन्त्र पट्टों के निस्तारण आदि कार्य समिम्मलित हैं।

(ख) गैरकानूनी निर्माण को रोकना तथा उसे हटाना, अतिक्रमण को रोकना तथा उसके विरूद्ध कार्यवाही करना।

(ग) पी0डब्ल्यू0डी0 विभाग के गैंगमैनों के कार्या, विद्युत व्यवस्था के लाइन मैनों तथा जलापूर्ति की सामान्य व्यवस्था का निरीक्षण करना।

3. श्री ईष्वर सिंह, कार्य पर्यवेक्षक के कार्य

(क) पानी की सफाई तथा सप्लाई व्यवस्था का पर्यवेक्षण तथा रख-रखाव करना।

(ख) पानी के लाइनमैनों तथा पम्प आपरेटरों के कार्यों का पर्यवेक्षण करना।

दर सूची

कार्यवाही शुल्कः- रूपया ₹ 5.00 प्रति वर्गफीट (भूमि के नवीनीकरण, स्वतन्त्र पट्टों के मामलों तथा भवन निर्माण के

मानचित्रों में)

स्थानान्तरणर शुल्कः- ₹ 500.00

लेयिंग शुल्कः- ₹ 10.00 प्रति वर्गमीटर

सड़कों का रखरखावः- बोर्ड 11 किमी0 की डामरीकृत रोड तथा 8.60 किमी0 की कच्ची सड़क का रखरखाव का कार्य करता है तथा 13 किमी0 की डामरीकृत सड़क का रख-रखाव पी.डब्ल्यू.डी. विभाग द्वारा देखा जाता है।

विद्युतिकरणः- विद्युत उत्तराखण्ड पावर काॅरपोरेषन द्वारा उपलब्ध कार्यवाही की जाती है, रास्तों के विद्युत स्तम्भों की षिकायतों को छावनी परिषद द्वारा हल किय जाता है। अभियान्त्रिकी अनुभाग सभी कार्यदिवसों में कार्यालय समय पर खराब पड़ी लाइटों को ठीक करने तथा बदलने के लिए तैयार रहते हैं।

मलनिस्तारण तथा परनालियाँ- जहाँ कहीं भी संभव हो, गृहस्वामी परनालियों के कनैक्षन के लिए विभाग में आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं तथा यदि इसकी अनुमति प्राप्त होती है तो यह कनैक्षन बोर्ड के स्टाफ की देख-रेख में प्रदान किया जाता है।

बोर्ड ने लगभग सभी रिहायषी क्षेत्रों में पानी निकासी की व्यवस्था उपलब्ध करवाता है जो कि अच्छी सुचारू अवस्था में है।

भवन रख-रखावः-

व्यवसायिक प्रष्ठिान/आवासी भवन

लघु मरम्मतः-

1. पानी सम्बन्धी षिकायत, जल रिसावः- 1से 24 धण्टे के भीतर

2. सीमेन्ट, प्लास्टर, फर्ष की मरम्मतः- 15 दिनों के भीतर

3. लकड़ी का कार्य, कांच के नये रोषनदानः- 15 दिनों के भीतर

4. बड़ी मरम्मतः- दरवाजों, खिड़कियों, शटरों को बदलना, बड़े आकार के काँच के सीलन, फर्ष की बड़ी मरम्मतें:

05 से 10 महीने के भीतर।

5. भवनों के नक्षेः- छावनी क्षेत्र में कोई भी जो किसी भवन का निर्माण करना चाहे अथवा पुराने भवन को ठीक कर नया बनवाना चाहे, से यह अपेक्षा की जाती है कवह एक निष्चित प्रार्थना पत्र प्रारूप में लिखित रूप में आवेदन कर सकते हैं। भवन निर्माण सम्बन्धी सभी गतिविधियाँ छावनी अधिनियम के अन्तर्गत नियमित की जाती हैं तथा भवन निर्माण सम्बन्धी छावनी परिषद के नियम कानूनों पर आधारित हैं। म्यूनिसिपल के अन्य कार्यकलापों के अलावा दाखिल खारिज की प्रक्रिया को भी छावनी परिषद स्वयं देखता है क्योंकि छावनी परिषद के न्यायिक क्षेत्र में आने वाली अधिकतर भूमि सैन्य भूमि है।

 दाखिल खारिज सम्बन्धित प्रार्थना पत्र किसी भी कार्यदिवस में छावनी कार्यालय में जमा किया जा सकता है, जो कि एक निष्चित प्रारूप में होगा।

 यदि प्रार्थना पत्र अपूर्ण अथवा उसमें कोई गलती पायी जाती है तो प्रार्थी को 30 दिनों के भीतर इसकी सूचना प्रदान की जाती है।

 आवेदन पत्र में कमी अथवा गलती को दूर करने के पष्चात् परिषद कर्मचारियों द्वारा निरीक्षण कर यह सुनिष्चित किया जाता है कि सरकार द्वारा उल्लिखित नियम कानूनों का उल्लंघन तो नहीं किया गया है।

 यदि किसी नियम-कानून का उल्लंघन पाया जाता है तो 45 दिवस भीतर प्रार्थी को इसकी जानकारी दे दी जाती है।

 सभी साफ-सुथरे तथा अविवादित मामलों को सिविल क्षेत्र समिति की अगली बैठक में विचार हेतु प्रस्तुत किया जाता है तथा परिषद की अन्तिम पुष्टी के बाद एक सार्वजनिक ज्ञापन को सामाचार पत्रों में प्रार्थी द्वारा अदा की गयी कीमत पर प्रकाषित किया जाता है तथा आम जनता से, आपत्ति आमंत्रित की जाती है, यदि किसी को हो।

 यदि परिषद को आपत्ति प्राप्त होती है तो सिविल क्षेत्र समिति तथा परिषद, उसका यथाचित हल निकालते हैं तथा अन्तिम दाखिल खारिज के लिए उस मामले को परिषद द्वारा संस्तुति दी जाती है अथवा परिषद द्वारा उसे बन्द कर दिया जाता है।

 उसके पष्चात् यदि आवष्यक हो तो जी.एल.आर. में आवष्यक संषोधन किये जाते हैं तथा बोर्ड के प्रस्ताव के आधार पर अधिषासी अधिकारी के हस्ताक्षर से संषोधन लागू किया जाता है।

वेबसाइट अद्यतन 01/01/2017    आगंतुक   संख्या